जयपुर। लोन चुकाने के बाद बकाया निकाल देने पर उपभोक्ता मंच ने एक निजी बैंक पर न केवल आठ लाख रूपए का जुर्माना लगाया बल्कि बैंक की इस करतूत को लूट करार दिया है। मंच ने आदेश में कहा कि बैंक इससे बड़ा धोखा किसी उपभोक्ता के साथ नहीं कर सकता।
वैशाली नगर में रहने वाले डॉ. आलोक सक्सेना के परिवाद पर जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण ने यह आदेश दिया। आलोक ने अधिवक्ता इदरिस मुगल के मार्फत दायर परिवाद में बताया कि उसने 2006 में एक कार के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 5.25 लाख का लोन लिया था। कुछ किश्तें देने के बाद उन्होंने जनवरी 2007 में पूरे लोन की अदायगी के लिए 499,769 रूपए जमा कराए और फुल एण्ड फाइनल की रसीद ले ली।
एनओसी के बदले निकाला बकाया
इसके बाद बैंक ने एनओसी देने के बजाय ईसीएस के जरिए भुगतान हासिल करने की कोशिश की। चेक बाउंस होने पर पेनल्टी लगाते हुए आठ महीने में करीब 25 हजार रूपए बकाया और निकाल दिए। आलोक ने दायर मामले में कहा कि रूपए देने के बाद भी बैंक की ओर से धमकी भरे फोन आने लगे। यहां तक कि उनका नाम क्रेडिट इन्फोरमेशन ब्यूरो लि. की ब्लैक लिस्ट में दर्ज कर दिया गया।
ये कैसी बैंकिंग
सुनवाई के बाद मंच ने माना कि उपभोक्ता ने सात महीने में 81,690 रूपए अदा किए। इसमें 20419 रूपए ब्याज के और 61,271 रूपए मूल पेटे जमा हुए। इस आधार पर लोन चुकता करने के लिए जमा हुए 499769 रूपए बैंक की राशि से करीब 36 हजार रूपए ज्यादा थे। बैंक ने बकाया निकाला, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि यह रकम किस बात के लिए ली जा रही है।
निजी बैंक पर लगाया आठ लाख का जुर्माना
मंच ने परिवादी पर निकाले बकाया 56414 रूपए निरस्त कर उनका नाम ब्लैक लिस्ट से हटाने का आदेश दिया। बैंक पर आठ लाख का जुर्माना भी लगाया। इसमें से एक लाख रूपए परिवादी को और सात लाख रूपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में अदा करने होंगे। मंच बैंक को परिवादी की ओर से जमा राशि का आठ माह का ब्याज देने तथा परिवाद व्यय के रूप में पांच हजार रूपए अदा करने के आदेश दिए हैं।
इससे पहले भी उपभोक्ता मंच निजी बैंकों की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणियां करते हुए जुर्माना भी लगा चुका है। ताजा मामले में निजी बैंक की कार्यशैली को उपभोक्ता मंच ने बैंकिंग ही नहीं माना है। मंच ने कहा कि बैंक का रवैया उपभोक्ता को धोखा देने जैसा है।-राजस्थान पत्रिका, Monday, 12 Dec 2011 3:14:19 hrs IST