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Wednesday, 12 December 2012

फोरम ने 12 हजार की क्षतिपूर्ति का दिया फैसला| स्कूल के समीप तम्बाकू,तेरह लोगों को जुर्माना| कंपनी ने गलती स्वीकार की गलती, 10 हजार जुर्माना|

फोरम ने 12 हजार की क्षतिपूर्ति का दिया फैसला

पीलीभीत : उपभोक्ता फोरम ने गेहूं बीज में अन्य वैरायटी मिश्रित होने से पैदावार में हुई क्षति के मामले में एक किसान को 12 हजार की क्षतिपूर्ति दिए जाने का फैसला दिया है।

पूरनपुर तहसील के ग्राम जरा निवासी कमलजीत ने किसान सेवा सहकारी समिति शिवनगर, पूरनपुर और मैसर्स जसवंती क्वालिटी सीड्स पूरनपुर के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में वाद दायर किया था। कमलजीत ने विपक्षी पार्टी पर यह आरोप लगाया कि उसने यहां से जो गेहूं बीज खरीदा था, उसमें अन्य प्रजातियां मिली होने के कारण पैदावार को काफी नुकसान पहुंचा था। इस पर पीड़ित ने 99 हजार का दावा भी फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया था। दोनों पक्षों के बीच हुई सुनवाई के बाद फोरम ने इस मामले में फैसला सुना दिया है। जिसमें फोरम ने कमलजीत का पक्ष लेते हुए निर्णय सुनाया कि 10 हजार रुपये आर्थिक और मानसिक क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय व अधिवक्ता शुल्क के तौर पर कुल 12 हजार रुपये पीड़ित किसान को मिलना चाहिए।
स्त्रोत : जागरण, 10.12.12
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स्कूल के समीप तम्बाकू,तेरह लोगों को जुर्माना

सुपौल, जागरण प्रतिनिधि: विद्यालय के नजदीक दुकानों में तम्बाकू निर्मित सामानों की बेरोकटोक की जा रही बिक्री के बाबत पुलिस प्रशासन सजग दिखने लगा है। मंगलवार को सुपौल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने जिला मुख्यालय स्थित चार सरकारी शिक्षण संस्थानों के पास दुकानों में छापामारी कर 13 दुकानदारों को जुर्माना किया। ये सरकारी शिक्षण संस्थान आदर्श मध्य विद्यालय, बमवि चकला निर्मली, हजारी उच्च विद्यालय व डिग्री कालेज हैं। डीएसपी मनोज कुमार ने बताया कि सरकारी संस्थानों के समीप सौ गज के दायरे में तम्बाकू निर्मित कोई भी सामान बेचना कानूनन अपराध है। इसी के मद्देनजर उक्त चारों सरकारी शिक्षण संस्थानों के पास के 13 दुकानों में छापामारी की गई जहां तम्बाकू निर्मित सामान बेचते पाया गया। उक्त सभी दुकान से सम्बन्धित दुकानदारों को दो-दो सौ रुपये जुर्माना किया गया है। इधर डीएसपी द्वारा किए गए इस छापामारी से बाजार में तम्बाकू निर्मित सामानों की बिक्री करने वाले दुकानदारों के बीच हड़कम्प मच गया और अपने-अपने दुकानों से तम्बाकू निर्मित सामानों को दुकान से बाहर अन्यत्र रख दिया।
स्त्रोत : जागरण, 11.12.12
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कंपनी ने गलती स्वीकार की गलती, 10 हजार जुर्माना

जागरण संवाद केंद्र, बहादुरगढ़ : फसल में दीमक पर नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाई के सैंपल फेल होने के मामले में संबंधित कंपनी ने सोमवार को बहादुरगढ़ की अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया। ऐसे में अदालत ने कानूनी तौर पर फैसला लेते हुए कंपनी पर 10 हजार रुपये जुर्माना किया है।

पिछले दिनों कंपनी की याचिका को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। कंपनी की ओर से इस याचिका में निचली अदालत में कृषि विभाग की ओर से दायर किए गए केस को खत्म करने की अपील की गई थी।

मामला तो कई वर्ष पुराना है लेकिन संबंधित कंपनी की ओर से यह याचिका दो साल पहले दायर की गई थी। जिस पर पिछले सप्ताह पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने यह फैसला दिया। कृषि विभाग की ओर से वर्ष 2003 में क्लोरोपायरीफोर्स दवाई का सैंपल लिया गया था। यह दवाई फसल में दीमक के खात्मे के लिए इस्तेमाल की जाती है। बाद में जब इस दवाई का सैंपल फेल हुआ तो कृषि विभाग की ओर से उच्चाधिकारियों की अनुमति के बाद दवाई का निर्माण करने वाली गुड़गाव की कंपनी धानुका एग्रीकेट (तब नार्दन मील्स) के खिलाफ बहादुरगढ़ की अदालत में केस दायर कर दिया था। बाद में इस कंपनी ने वर्ष 2010 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की और इसमें यह माग की गई कि निचली अदालत में उसके खिलाफ चल रहे केस को रद किया जाए। न्यायालय ने कंपनी की अपील को ठुकराते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। ऐसे में बहादुरगढ़ न्यायालय में इस केस की सुनवाई शुरू हुई तो कंपनी ने अपना गुनाह ही कबूल कर लिया। इस पर अदालत ने कंपनी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना किया।
स्त्रोत : जागरण, 12.12.12
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Tuesday, 13 December 2011

'बैंकिंग नहीं, ये लूट है' !

जयपुर। लोन चुकाने के बाद बकाया निकाल देने पर उपभोक्ता मंच ने एक निजी बैंक पर न केवल आठ लाख रूपए का जुर्माना लगाया बल्कि बैंक की इस करतूत को लूट करार दिया है। मंच ने आदेश में कहा कि बैंक इससे बड़ा धोखा किसी उपभोक्ता के साथ नहीं कर सकता।

वैशाली नगर में रहने वाले डॉ. आलोक सक्सेना के परिवाद पर जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण ने यह आदेश दिया। आलोक ने अधिवक्ता इदरिस मुगल के मार्फत दायर परिवाद में बताया कि उसने 2006 में एक कार के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 5.25 लाख का लोन लिया था। कुछ किश्तें देने के बाद उन्होंने जनवरी 2007 में पूरे लोन की अदायगी के लिए 499,769 रूपए जमा कराए और फुल एण्ड फाइनल की रसीद ले ली।

एनओसी के बदले निकाला बकाया
इसके बाद बैंक ने एनओसी देने के बजाय ईसीएस के जरिए भुगतान हासिल करने की कोशिश की। चेक बाउंस होने पर पेनल्टी लगाते हुए आठ महीने में करीब 25 हजार रूपए बकाया और निकाल दिए। आलोक ने दायर मामले में कहा कि रूपए देने के बाद भी बैंक की ओर से धमकी भरे फोन आने लगे। यहां तक कि उनका नाम क्रेडिट इन्फोरमेशन ब्यूरो लि. की ब्लैक लिस्ट में दर्ज कर दिया गया।

ये कैसी बैंकिंग
सुनवाई के बाद मंच ने माना कि उपभोक्ता ने सात महीने में 81,690 रूपए अदा किए। इसमें 20419 रूपए ब्याज के और 61,271 रूपए मूल पेटे जमा हुए। इस आधार पर लोन चुकता करने के लिए जमा हुए 499769 रूपए बैंक की राशि से करीब 36 हजार रूपए ज्यादा थे। बैंक ने बकाया निकाला, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि यह रकम किस बात के लिए ली जा रही है।

निजी बैंक पर लगाया आठ लाख का जुर्माना
मंच ने परिवादी पर निकाले बकाया 56414 रूपए निरस्त कर उनका नाम ब्लैक लिस्ट से हटाने का आदेश दिया। बैंक पर आठ लाख का जुर्माना भी लगाया। इसमें से एक लाख रूपए परिवादी को और सात लाख रूपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में अदा करने होंगे। मंच बैंक को परिवादी की ओर से जमा राशि का आठ माह का ब्याज देने तथा परिवाद व्यय के रूप में पांच हजार रूपए अदा करने के आदेश दिए हैं।

इससे पहले भी उपभोक्ता मंच निजी बैंकों की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणियां करते हुए जुर्माना भी लगा चुका है। ताजा मामले में निजी बैंक की कार्यशैली को उपभोक्ता मंच ने बैंकिंग ही नहीं माना है। मंच ने कहा कि बैंक का रवैया उपभोक्ता को धोखा देने जैसा है।-राजस्थान पत्रिका, Monday, 12 Dec 2011 3:14:19 hrs IST

Tuesday, 6 December 2011

खराब मोबाइल हैंडसेट देने पर पांच हजार का जुर्माना!

उदयपुर! ग्राहक को खराब मोबाइल हैंडसेट देने और रिपेयरिंग में भी लापरवाही के मामले में कंपनी के खिलाफ पांच हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जिला उपभोक्ता संरक्षण मंच के पीठासीन अधिकारी शिव सिंह चौहान, सदस्य संगीता नेपालिया और वाहिद नूर कुरैशी ने यह फैसला दिया है।
इस संबंध में परिवादी शीतला मार्ग, पीडब्ल्यूडी, ऑफिस के पास रहने वाले दिनेशचंद्र शर्मा ने पेरागल मोबाइल उदियापोल और स्पाइस टेलीकॉम लिमिटेड नोयडा के प्रबंधक के खिलाफ 25 फरवरी 210 को परिवाद प्रस्तुत किया था।
क्या था मामला : परिवादी ने 1 पेरागन से एक मोबाइल 2100 रुपए में खरीदा था। एक माह बाद ही मोबाइल में खराबी आ गई थी। संबंधित दुकान के मार्फत हैंडसेट को तीन बार रिपेयरिंग को दिया। रिपेयरिंग नहीं हुई। इस पर परिवादी ने यह कार्रवाई की। आदेश : अदालत ने पेरागल मोबाइल के खिलाफ वाद अस्वीकार किया और टेलीकॉम लिमिटेड के प्रबंधक के विरुद्ध स्वीकार कर उसे 2 दो माह की अवधि में परिवादी को पांच हजार रुपए अदा करने का आदेश दिया।-03 Dec, 11, PRESSNOTE DOT IN

पथरी के ऑपरेशन में किडनी बेकार, नर्सिंग होम के खिलाफ पांच लाख जुर्माना!

उदयपुर | पथरी के ऑपरेशन के दौरान हुई गड़बड़ी से किडनी बेकार हो जाने के मामले में जिला उपभोक्ता संरक्षण मंच ने निजी नर्सिंग होम के खिलाफ पांच लाख रुपए का हर्जाना आदेश सुनाया है। यह हर्जाना नर्सिंग होम के मैनेजिंग डायरेक्टर को भरना होगा। छह साल पहले यह ऑपरेशन एक महिला के कराया गया था। 
जिला उपभोक्ता संरक्षण मंच के अध्यक्ष शिव सिंह चौहान, सदस्य संगीता नेपालिया व वाहिद नूर कुरैशी ने सोमवार को फैसला सुनाया। इस संबंध में परिवादी हाथीपोल पन्नाधाय मार्ग निवासी खातून (40) पत्नी अल्ताफ हुसैन ने सरदारपुरा स्थित कल्पना नर्सिंग होम के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सुनील चुघ, चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष हाल, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के ब्रांच मैनेजर, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी के ब्रांच मैनेजर व नर्सिंग होम के डॉ. जावेद के खिलाफ परिवाद पेश किया गया था। 11 अप्रैल 2005 को यह परिवाद प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने नर्सिंग होम के प्रबंध निदेशक डा. सुनील चुघ के खिलाफ ही यह परिवाद स्वीकार किया था।-29 Nov, 11 11:45, PRESSNOT DOT COM

Saturday, 19 November 2011

बीमा क्लेम की राशि चुकाने के निर्देश

भीलवाड़ा| जिला उपभोक्ता मंच ने दिया निर्णय रेलमगरा। जिला उपभोक्ता सरंक्षण मंच राजसमन्द ने एक परिवाद पर निर्णय देते हुए बीमा कम्पनी को परिवादी को बीमा राशि चुकाने के निर्देश दिए है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा जिले के रामलाल चौधरी ने अपने ट्र्र्रक संख्या आरजे ३० जीए ०७९५ का १४ दिसम्बर २००६ को युनाईटेड ईण्डिया इंश्योरेन्स कंपनी में बीमा कराया था। बीमा अवधि पूर्ण होने से पूर्व ही २७ जनवरी २००७ को शार्ट सर्किट के कारण ट्रक आग से जलकर पूरी तरह से नष्ट हो गया जिसपर परिवादी ने बीमा कम्पनी को बीमा क्लेम पारित करने का प्रार्थना पत्र दिया। इस मामले में बीमा कम्पनी ने ट्रक को ऑवर लोड बताते हुए क्लेम राशि चुकाने से इंकार कर दिया। इसी दौरान परिवादी की मौत हो जाने के कारण परिवादी के वारिसान संजना, सीमा एवं सुरेशचंद्र ने जिला उपभोक्ता विवाद मंच राजसमन्द में प्रकरण दर्ज कराया। इन तीनों परिवादियों के अधिवक्ता गोपालकृष्ण जाट ने प्रकरण में कार्यवाही करते हुए उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष गौतमप्रकाश चौधरी, सदस्य नरेन्द्र सनाढ्य एवं डॉ. शीप्रा ने दोनों पक्षों के बयानों को सुनकर सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ट्रक को ओवर लोड नही माना एवं परिवादी के वारिसानों कुल बीमा राशि का ७५ फीसदी राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए। साथ ही मंच ने एक माह की अवधि में बीमा क्लेम की राशि का भुगतान नहीं होने पर वार्षिक दर से अतिरिक्त ब्याज दर सहित राशि का भुगतान करने के आदेश जारी किए है। केबल चोरी, फोन सेवा ठप चित्तौडग़ढ़। नगर के कई क्षैत्रों में सैकड़ों फोन केबल चोरी होने से डेड हो गए। जानकारी के अनुसार, मीरानगर, शात्रीनगर एवं ङ्क्षजक नगर के सैकड़ों बेसिक फोन गत कुछ दिनों से डेड पड़े हुए हैं, बताया जाता है कि सानिवि द्वारा खुदवाए जा रहे एक नाले से केबल चोरी होने की वजह से यह फोन डेड हो गए। दूर संचार अधिकारियों के अनुसार, शनिवार सांय तक सभी फोन कार्य करने लगेंगे।-Pratah Kaal, 19.11.11 

Thursday, 17 November 2011

वाहन की मरम्मत बीमा क्लेम : उपभोक्ता को 64 हजार 649 रूपए का भुगतान करने का आदेश!

राजसमंद। अपने किसान उपभोक्ता बीमा क्लेम की राशि देने से इनकार करना बीमा कंपनी को भारी पड़ा। जिला उपभोक्ता मंच ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के अघिकारियों को उपभोक्ता को 64 हजार 649 रूपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। प्रकरण के अनुसार पोखर, नैना व उसके भाई मथुरा पुत्र नाथू कुमावत निवासी आगरिया तहसील आमेट ने यूनाइटेड इण्डिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से अपने ट्रैक्टर का बीमा कराया था। 

बीमा की अवघि 7 मार्च, 2009 से 6 मार्च, 2010 तक थी। इस बीच बीमा अवघि में ट्रैक्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। तीनों ने इसकी जानकारी बीमा कंपनी को दी और वाहन की मरम्मत के लिए कंपनी के समक्ष बीमा क्लेम पेश किया। कंपनी की ओर से एक सर्वेयर नियुक्त किया गया, जिसने नुकसान का आकलन 64 हजार 649 रूपए किया। कंपनी ने यह कहते हुए कि ट्रैक्टर में लगाई गई ट्रॉली बीमित नहीं थी और ट्रैक्टर का हुक टूट जाने से नुकसान हुआ है, बीमा क्लेम पास करने से मना कर दिया। जिला उपभोक्ता मंच 

परेशान होकर तीनों ने मंच के समक्ष परिवाद पेश किया। मंच अध्यक्ष गौतमप्रकाश शर्मा, सदस्य नरेन्द्र सनाढ्य व डॉ. शिप्रा ने मामले में पेश पत्रावलियों का अवलोकन करने व दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद कंपनी की ओर से सेवा में कमी करने का मामला सामने आया। इस पर मंच ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाया व बीमा कंपनी को उपभोक्ता को उपरोक्त राशि का भुगतान करने व एक माह में राशि अदा नहीं करने पर 9 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया। स्त्रोत :प्रेसनोट.इन, २४.१०.११

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