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Monday, 7 May 2012

इंमीग्रेशन कंपनी पर ठोंका दो लाख हर्जाना

इंमीग्रेशन कंपनी पर ठोंका दो लाख हर्जाना
Jagran, Updated on: Sun, 06 May 2012 01:04 AM (IST)

जागरण संवाददाता, बरनाला

दो विद्यार्थियों को स्टडी वीजा के आधार पर विदेश भेजने के नाम पर करीब दस लाख रुपये की चपत लगाने वाली दो इमीग्रेशन कंपनियों पर जिला उपभोक्ता फोरम ने दो लाख रुपये हर्जाना ठोंका है। साथ ही वसूली गई राशि छह प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार सतनाम सिंह व गगनदीप सिंह दोनों निवासी मूंम, जिला बरनाला ने 28 जुलाई 2011 को जिला उपभोक्ता फोरम में केस दायर कर बताया कि उन्होंने 2004 में प्लस टू की शिक्षा पूरी करने उपरांत स्टडी वीजा के आधार पर विदेश जाने के लिए सिविफट इंमीग्रेशन कंपनी खन्ना के मालिक संदीप कुमार राठी से संपर्क किया जिन्होंने उन्हें अपने पार्टनर सुनील कुमार जौली निवासी राजपुरा, उसकी पत्‍‌नी मीनावती जौली, एचडीएफसी बैंक के अधिकारी युवराज भंडल खन्ना, आरटीएस इंमीग्रेशन कंपनी खन्ना के मालिक मनप्रीत रंधावा को मिलाया। उक्त सभी व्यक्तियों ने बताया कि वह उन्हें इंटरनेशनल बिजनेस स्टडी स्कूल यूके में दाखिल करवा देंगे। इसके लिए उन्होंने विभिन्न किश्तों के जरिए प्रति विद्यार्थी 4,23,000 रुपये वसूले। साथ ही कहा कि उन्हें विदेश जाने से पहले अपने बैंक खाते में दस-दस लाख रुपये दिखाने होंगे।

इसमें असमर्थता जताने पर उक्त व्यक्तियों ने कहा कि वह उक्त राशि खुद उनके खातों में जमा करवा देंगे, मगर इसका ब्याज प्रति विद्यार्थी 70 हजार अलग से देना होगा, जो दोनों ने दे दिया। परंतु उक्त लोगों ने जरूरत की राशि अपनी तरफ से बैंक में जमा नहीं करवाई, जिसके आधार पर उनका स्टडी वीजा रद हो गया।

विद्यार्थियों ने कहा कि हमारे रुपये लौटाने की बजाय आरोपी लंबे समय तक उन्हें हंगरी अथवा सिंगापुर भेजने का वादा करते रहे। आखिर में उन्होंने पैसे लौटाने व स्टडी वीजा के आधार विदेश भेजने से साफ इन्कार कर दिया।

इस पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में न्याय की गुहार लगाई। फोरम ने केस में शामिल उक्त सभी व्यक्तियों को सम्मन किए परंतु लंबे समय तक उन्होंने सम्मन तामील ही नहीं किए जिसके बाद अदालत ने समाचार पत्रों में इशतहार देकर ही सम्मन तामील करवाए। फोरम के प्रधान जज संजीव दत्त शर्मा की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने उपरांत उक्त इमीग्रेशन कंपनियों के व्यवहार को अनुचित करार देकर दोनों विद्यार्थियों से वसूली राशि छह प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने तथा दोनों विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपये हर्जाने के तौर पर तीस दिनों के भीतर अदा करने के आदेश दिए।

Saturday, 5 May 2012

हर्जाना और शिकायत व्यय अदा करने के आदेश

हर्जाना और शिकायत व्यय अदा करने के आदेश
Dainik Tribune Posted On May - 5 - 2012

मंडी,5 मई (निस )। जिला उपभोक्ता फोरम ने विद्युत बोर्र्ड को गलत बिल जारी करने पर तीन मामलों में उपभोक्ताओं के पक्ष में हर्जाना और शिकायत व्यय अदा करने के आदेश किये हैं।

फोरम ने उपभोक्ताओं के पक्ष में तीस दिनों में नया बिल जारी करने और अधिक वसूली गई राशि को आगामी बिलों में एडजस्ट करने के भी निर्देश दिये हैं। जिला उपभोकता फोरम के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज और सदस्यों रमा वर्मा एवं लाल सिंह ने यह आदेश जारी किय हैं । अपने अहम फैसलों में सांबल (अपर बैहली) निवासी श्याम लाल पुत्र संत, कुसुम चंद पुत्र निका राम और रोशन लाल पुत्र केशु राम के पक्ष में हिमाचल प्रदेश राज्य विदयुत बोर्ड को क्रमश: दो-दो हजार और 1500 रुपये हर्जाना और क्रमश: पंद्रह-2 सौ व एक हजार रुपये शिकायत व्यय अदा करने के आदेश दिये हैं।

फोरम में दायर इन शिकायतोंं के मुताबिक उपभोक्ताओं ने बोर्ड से बिजली का कनेक्शन लिया था, लेकिन उपभोक्ताओंं को गलत मीटर रीडिंग के आधार पर बिल जारी किये। उपभोक्ताओं ने जब इस बारे में बोर्ड के अधिकारियों को संपर्क किया तो उन्हें मीटर काट देने की धमकी दी गई, जिसके चलते उन्होंने फोरम में शिकायत दर्ज करवाई । फोरम ने अपने फैसले में कहा कि बोर्ड की ओर से इन मामलों में अपनी स्थिति जाहिर करने के संबंध में कोई सबूत पेश नहीं किये गये। फोरम ने कहा कि गलत मीटर रीडिंग के आधार पर उपभोक्ताओं को अधिक बिल जारी करना बोर्ड की सेवाओं में कमी को दर्शाता है। ऐसे में फोरम ने बोर्ड को 30 दिन में नये बिल जारी करने के आदेश दिये। वहीं पर बोर्ड की सेवाओं में कमी के चलते उपभोक्ताओं को हुई परेशानी के बदले हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया।

Wednesday, 7 March 2012

उपभोक्ता फोरम का आदेश नहीं मानने पर एक वर्ष की सजा

यमुनानगर, मुख्य संवाददाता : जिला उपभोक्ता विवाद निस्तारण फोरम के आदेशों को ठेंगा दिखाना एक कंपनी संचालक को भारी पड़ गया। फोरम ने उसे एक वर्ष कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न चुकाने पर एक माह की अतिरिक्त कैद काटनी पड़ेगी।

गांव खेड़ी दर्शन सिंह निवासी जसबीर सिंह ने गेटवे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के संचालक जेडी सुरजीत सिंह के पास 8 नवंबर 2004 को कंपनी की योजना के तहत मारुति कार लेने के लिए 10,400 रुपये जमा करवाए थे। इसके अगले महीन 10,400 रुपये फिर जमा करवाए गए। तीन महीने के भीतर कार मिलने के आश्वासन पर उसने 29 दिसंबर को फिर 10,400 रुपये जमा करवाए।

तीन माह बाद जब जसबीर सिंह ने सुरजीत से संपर्क किया तो उसे 70 हजार और जमा करवाने को कहा गया, जो कि जसबीर ने 8 अप्रैल 05 को जमा करवा दिए। इसके बावजूद न तो उसे गाड़ी दी गई और न ही राशि लौटाई गई। इस पर जसबीर सिंह मामले को जिला उपभोक्ता एवं निस्तारण फोरम में ले गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फोरम ने 27 अक्टूबर 10 को दिए फैसले में कंपनी संचालक को 90,800 रुपये का उपभोक्ता को 9 फीसदी की दर से भुगतान के अलावा कानूनी खर्चे के तौर पर 3300 रुपये देने को कहा। लेकिन, सुरजीत ने कोई राशि अदा नहीं की जिस पर गत 4 जनवरी को उसे जेल भेज दिया गया। कोर्ट में पेश होकर सुरजीत ने बताया कि उसकी बेटी की शादी है और वह दो महीने के भीतर राशि अदा कर देगा। इस पर उसे दो माह की मोहलत दे दी गई।

निर्धारित समय में भी जब सुरजीत ने अपने वादे का पालन नहीं किया तो मामला फिर उपभोक्ता फोरम में पहुंचा। सुरजीत ने फोरम में पेश होकर कहा कि वह गरीब है तथा दो छोटे बच्चों के अलावा अपाहिज पत्नी का भार उस पर है। इसलिए उसे सजा से माफी दी जाए। अपने फैसले में फोरम के अध्यक्ष दीनानाथ अरोड़ा व सदस्य डॉ. वीके शर्मा ने कहा कि आरोपी अपनी कंपनी खोलकर पैसे लेकर सदस्य बनाता था व उन्हें कम कीमत में वाहन देने के वादे कर उपभोक्ताओं को लुभा रहा था। जसबीर ने भी झांसे में आकर मोटी राशि जमा करवाई, लेकिन उसे न तो कार दी गई और न ही राशि लौटाई। यहां तक कि फोरम का आदेश भी नहीं माना। ऐसे व्यक्ति को छोड़ने से समाज में गलत संकेत जाएगा।

फोरम ने आरोपी सुरजीत सिंह को एक साल कैद की सजा सुनाने के साथ ही 5000 रुपये जुर्माना किया। इसके खिलाफ अपील दायर करने के लिए समय मांगने पर फोरम 9 अप्रैल तक के लिए एक लाख रुपये की जमानती आदेश दिए।-Updated on: Wed, 07 Mar 2012 07:57 PM, Jagran

Wednesday, 22 February 2012

उपभोक्ता अदालत का फैसला

उपभोक्ता अदालत का फैसला

कुरुक्षेत्र : जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने अंसल प्रॉपर्टीज एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा सुरेन्द्र एंड कम्पनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि अंसल प्रॉपर्टी 30 दिनों के भीतर उपभोक्ता संगीता रानी को 3 लाख 5 हजार रुपए अदा करे वरना 8 प्रतिशत सलाना ब्याज भी अदा करना होगा। कोर्ट के आदेशानुसार संगीता रानी पत्नी विरेन्द्र कुमार, अग्रवाल ब्रदर्स, पालिका बाजार, जिला कुरुक्षेत्र तथा सोहन लाल, अग्रवाल बुक डिपो ने अंसल प्रॉपर्टी कालोनाइजर से सुरेन्द्र एंड कम्पनी प्रॉपर्टी एडवाइजर के माध्यम से 300 वर्गगज का प्लाट 5 मई 2006 को खरीदा जिसके लिए उपभोक्ता ने अग्रिम राशि 3 लाख रुपए अदा किए। उपभोक्ता ने अदालत को बताया कि कम्पनी के नियमों अनुसार आवेदन करने के 12 महीनों के भीतर प्लाट अलाटमैंट करने का आश्वासन कम्पनी द्वारा दिया गया था मगर समय बीतने के बाद भी कम्पनी द्वारा कोई अलाटमैंट नहीं की गई।

इतना ही नहीं कालोनी में डिवैल्पमैंट के नाम पर कोई काम नहीं हुआ। उसके बाद शिकायतकर्ता ने 24 मई 2007 को ब्याज समेत पूरी रकम वापस करने को कहा, मगर कम्पनी के अधिकारियों ने कोई परवाह नहीं की बल्कि कम्पनी ने 300 गज की बजाय 263 गज के प्लाट की अलाटमैंटशिकायतकर्ता के नाम कर दी। जिस पर पीडि़त ने उपभोक्ता अदालत की शरण ली। 

जहां जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद तथा सदस्य हवा ङ्क्षसह नैन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया कि अंसल कालोनाइजर शिकायतकर्ता को 30 दिनों के भीतर 3 लाख रुपए का रिफंड करे तथा मानसिक उत्पीडऩ की एवज में 5 हजार रुपए जुर्माना अदा करे वरना 8 प्रतिशत सलाना ब्याज भी अदा करना होगा।-Panjab Kesri, 21.02.12

Tuesday, 10 January 2012

आरटीआई के जरिए मांगी जानकारी न देने पर डीटीओ को जुर्माना

कार्यालय प्रतिनिधि, मानसा! जिला उपभोक्ता फोरम मानसा (पंजाब) ने एक व्यक्ति द्वारा जिला ट्रांसपोर्ट अफसर (डीटीओ) से आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी न देने पर संबंधित अफसर को 10 हजार रुपये का जुर्माना व शिकायतकर्ता द्वारा मांगी सूचना देने का फैसला सुनाया है।

मानसा निवासी अलविंदर गोयल ने 8 नवंबर, 2011 को जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत करके जिला ट्रांसपोर्ट अफसर मानसा द्वारा उनको आरटीआई के जरिए मांगी जानकारी न देने की शिकायत दर्ज करवाई। जिसका फैसला सुनाते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष एसडी शर्मा, सदस्य नीना गुप्ता व शिव पाल बंसल ने जिला ट्रांसपोर्ट अफसर को 10 हजार रुपये जुर्माना व शिकायतकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी देने का हुक्म सुनाया है।
Posted on: Fri, 06 Jan 2012 10:35 PM (IST) in Jagran

Tuesday, 6 December 2011

न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर 90,500 का जुर्माना

मुजफ्फरनगर। मारुति कार का बीमा होने के बावजूद घर के बाहर से चोरी होने पर न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी द्वारा क्लेम न देने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने कंपनी पर 90 हजार 500 रुपये जुर्माना एक माह में अदा करने के आदेश दिये हैं। उपभोक्ता पिछले पांच वर्षाें से इंश्योरेंस कंपनी अधिकारियों के चक्कर लगा रहा था।
शहर के पटेलनगर निवासी कांति राठी पुत्र रामप्रसाद ने वर्ष 2000 मॉडल मारुति कार संख्या यूपी12ई-4345 का गत 6 जून 2005 में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की टाउनहाल के सामने वाली शाखा में बीमा कराया था, जो 5 जून 2006 तक वैध था। उक्त मारुति कार कांति राठी के घर के बाहर से गत 7 जून 2005 की रात चोरी हो गई, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। अंत में एसीजेएम प्रथम न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। रिपोर्ट दर्ज होने पर कार मालिक द्वारा न्यू इंश्योरेंस कंपनी की टाउनहाल शाखा में संपर्क कर क्लेम मांगा। आरोप है कि कुछ दिन तक चक्कर कटवाने के बाद कंपनी शाखा के प्रबंधक ने चोरी गई कार का क्लेम देने से इंकार कर दिया। अंत में पीड़ित कार मालिक ने इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की, जिसमें दोनों का पक्ष सुनने के बाद जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष एसके भट्ट व सदस्य बबली एवं मूलचंद शर्मा ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर चोरी गई कार की क्लेम राशि के रूप में 80 हजार, मानसिक संताप के रूप में आठ हजार रुपये एवं वाद व्यय के रूप में 2500 रुपये एक माह में अदा करने के आदेश दिये हैं।-Nov 19, 11:52 pm, jAGRAN 

इलाज का पैसा न देने पर इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये हर्जाना

रामपुर। इलाज का पैसा न देने पर उपभोक्ता फोरम ने ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये का हर्जाना डाला है। तहसील सदर के ग्राम काशीपुर आंगा निवासी किशन लाल ने वर्ष 2009 में ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी की एक पॉलिसी ली थी। 22 अगस्त 2010 की शाम उसे रास्ते में कुछ बदमाशों ने लूट के इरादे से गोली मार दी थी। गोली उसके पैर पर लगी थी। उसका निजी अस्पताल में उपचार हुआ, जिसमें काफी रकम खर्च हुई थी। जब उसने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो कंपनी ने उसकी फाइल खारिज कर दी। मजबूरन उसने अधिवक्ता सत्यपाल सिंह सैनी के माध्यम से उपभोक्ता प्रतितोष फोरम में 55 हजार रुपये का दावा दायर किया। इंश्योरेंस कंपनी ने फोरम में अपना पक्ष नहीं रखा। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष दलजिंदर पाल सिंह ने किशन लाल का दावा स्वीकार करते हुए ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाना एक माह में अदा करने के आदेश दिए हैं।-Nov 14, 11:54 PM, : JAGRAN 

Tuesday, 22 November 2011

न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर 90,500 का जुर्माना

मुजफ्फरनगर। मारुति कार का बीमा होने के बावजूद घर के बाहर से चोरी होने पर न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी द्वारा क्लेम न देने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने कंपनी पर 90 हजार 500 रुपये जुर्माना एक माह में अदा करने के आदेश दिये हैं। उपभोक्ता पिछले पांच वर्षाें से इंश्योरेंस कंपनी अधिकारियों के चक्कर लगा रहा था।

शहर के पटेलनगर निवासी कांति राठी पुत्र रामप्रसाद ने वर्ष 2000 मॉडल मारुति कार संख्या यूपी12ई-4345 का गत 6 जून 2005 में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की टाउनहाल के सामने वाली शाखा में बीमा कराया था, जो 5 जून 2006 तक वैध था। उक्त मारुति कार कांति राठी के घर के बाहर से गत 7 जून 2005 की रात चोरी हो गई, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। अंत में एसीजेएम प्रथम न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। रिपोर्ट दर्ज होने पर कार मालिक द्वारा न्यू इंश्योरेंस कंपनी की टाउनहाल शाखा में संपर्क कर क्लेम मांगा। आरोप है कि कुछ दिन तक चक्कर कटवाने के बाद कंपनी शाखा के प्रबंधक ने चोरी गई कार का क्लेम देने से इंकार कर दिया। अंत में पीड़ित कार मालिक ने इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की, जिसमें दोनों का पक्ष सुनने के बाद जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष एसके भट्ट व सदस्य बबली एवं मूलचंद शर्मा ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर चोरी गई कार की क्लेम राशि के रूप में 80 हजार, मानसिक संताप के रूप में आठ हजार रुपये एवं वाद व्यय के रूप में 2500 रुपये एक माह में अदा करने के आदेश दिये हैं।-Jgaran, 19.11.2011

ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये हर्जाना

रामपुर। इलाज का पैसा न देने पर उपभोक्ता फोरम ने ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये का हर्जाना डाला है। तहसील सदर के ग्राम काशीपुर आंगा निवासी किशन लाल ने वर्ष 2009 में ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी की एक पॉलिसी ली थी। 22 अगस्त 2010 की शाम उसे रास्ते में कुछ बदमाशों ने लूट के इरादे से गोली मार दी थी। गोली उसके पैर पर लगी थी। उसका निजी अस्पताल में उपचार हुआ, जिसमें काफी रकम खर्च हुई थी। जब उसने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो कंपनी ने उसकी फाइल खारिज कर दी। मजबूरन उसने अधिवक्ता सत्यपाल सिंह सैनी के माध्यम से उपभोक्ता प्रतितोष फोरम में 55 हजार रुपये का दावा दायर किया। इंश्योरेंस कंपनी ने फोरम में अपना पक्ष नहीं रखा। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष दलजिंदर पाल सिंह ने किशन लाल का दावा स्वीकार करते हुए ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाना एक माह में अदा करने के आदेश दिए हैं।-Jagran, 14.11.2011 

Thursday, 17 November 2011

हैल्थ बीमा क्लेम : इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये हर्जाना!

रामपुर। इलाज का पैसा न देने पर उपभोक्ता फोरम ने ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये का हर्जाना डाला है। तहसील सदर के ग्राम काशीपुर आंगा निवासी किशन लाल ने वर्ष 2009 में ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी की एक पॉलिसी ली थी। 22 अगस्त 2010 की शाम उसे रास्ते में कुछ बदमाशों ने लूट के इरादे से गोली मार दी थी। गोली उसके पैर पर लगी थी। उसका निजी अस्पताल में उपचार हुआ, जिसमें काफी रकम खर्च हुई थी। जब उसने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो कंपनी ने उसकी फाइल खारिज कर दी। मजबूरन उसने अधिवक्ता सत्यपाल सिंह सैनी के माध्यम से उपभोक्ता प्रतितोष फोरम में 55 हजार रुपये का दावा दायर किया। इंश्योरेंस कंपनी ने फोरम में अपना पक्ष नहीं रखा। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष दलजिंदर पाल सिंह ने किशन लाल का दावा स्वीकार करते हुए ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी पर तीस हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाना एक माह में अदा करने के आदेश दिए हैं। स्त्रोत : जागरण, 14.11.11

क्रेडिट कार्ड नहीं देना सेवा दोष : बैंक की जिम्मेदारी है वादा पूरा करना!

नई दिल्ली| बैंक अपने उपभोक्ता से अगर कोई सुविधा देने का वादा करता है, लेकिन वादा पूरा नहीं करता है तो वह जुर्माना भुगतने का हकदार है। यह टिप्पणी करते हुए सेंट्रल दिल्ली उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष बीबी चौधरी ने एक प्राइवेट बैंक प्रबंधन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आदेश के अनुसार बैंक प्रबंधन से मिलने वाली जुर्माना राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।

क्रेडिट कार्ड नहीं देना सेवा दोष, पेश मामले में जनकपुरी निवासी स्वर्णजीत सिंह ने उपभोक्ता फोरम में एक निजी बैंक के प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में स्वर्णजीत का कहना था कि उसने बैंक से लाइफटाइम फ्री क्रेडिट कार्ड 2800 रुपये में खरीदा था। उनका यह क्रेडिट कार्ड 23 अगस्त 2006 को गुम हो गया। इस संबंध में उन्होंने बैंक के कस्टमर केयर पर फोन करके नया क्रेडिट कार्ड देने के लिए आवेदन किया, मगर बैंक ने उसे क्रेडिट कार्ड नहीं दिया। इसके बाद उसने 18 सितंबर 2006 को लिखित में नए क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया, मगर फिर भी बैंक प्रबंधन ने उसे नया क्रेडिट कार्ड नहीं दिया। इसी तरह से बैंक के चक्कर काटते-काटते उसे पूरा एक साल बीत गया, मगर उसे नया कार्ड नहीं दिया गया। अंत में उसे परेशान होकर उपभोक्ता फोरम की शरण लेनी पड़ी। स्त्रोत : जागरण, १२.११.११

स्तन बड़ा करने के लिए की गई सौन्दर्य सर्जरी नाकाम मुआवजा नहीं!

मुंबई। एक अभिनेत्री ने 'खूबसूरती' बढ़ाने के लिए अपने स्तनों का ऑपरेशन कराया। इसके बाद भी उसे मायूसी हाथ लगी। इससे नाराज होकर उसने उपभोक्ता फोरम में सर्जरी करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ बीस लाख रुपये हर्जाने का दावा ठोंक दिया। अदालत ने यह कहकर उसे कोई राहत नहीं दी कि सर्जरी नाकाम रहने की वजह डॉक्टर नहीं, उसका कुत्ता था।

बांद्रा स्थित मुंबई जिला उपभोक्ता फोरम ने 5 नवंबर को अपने आदेश में कहा कि अभिनेत्री इलाज में लापरवाही का आरोप साबित करने में नाकाम रही। फोरम ने ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. संदीप शर्मा और डॉ ए एस बाली सिंह की यह दलील स्वीकार कर ली कि स्तन बड़ा करने के लिए की गई सर्जरी का अच्छा नतीजा नहीं निकलने का कारण अभिनेत्री का कुत्ता था। ऑपरेशन के बाद अभिनेत्री का कुत्ता उसके वक्ष पर कूद गया था।

उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जे एल देशपांडे और सदस्य डी एस बिदनुरकर ने अपने आदेश में कहा, 'अभिनेत्री ने न तो किसी पेशेवर को गवाह के तौर पर पेश किया और न ही कोई शपथ पत्र दायर किया जिससे बचाव पक्ष के लिखित बयान का खंडन होता हो। उसने डॉक्टरों के इस बयान का भी खंडन नहीं किया कि ऑपरेशन के बाद उसके बाएं वक्ष पर कुत्ते ने छलांग लगा दी थी। सुबूतों के अभाव में दूसरे पक्ष का बयान एक तरह से सही है। अभिनेत्री ने वर्ष 2008 में 14 जनवरी को भार्गव नर्सिग होम में सर्जरी कराई थी। ऑपरेशन के बाद उसे उसी दिन छुट्टी दे दी थी। इसके बाद वह 5 मार्च को अपने स्तनों में दर्द और नींद न आने की शिकायत लेकर फिर नर्सिग होम पहुंची थी। डॉक्टरों ने स्तनों को बड़ा करने के लिए उनके अंदर डाले गए पदार्थ को निकाल दिया था। स्त्रोत : जागरण, ११.११.11, 11:26 pm (मनचाही खूबसूरती न मिलने पर अभिनेत्री ने ठोंका दावा)

समय पर फ्लेट नहीं देना सेवा दोष : बिल्डर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम ने लगाया जुर्माना!

इलाहाबाद : उपभोक्ता की सेवा में कमी पाए जाने पर उपभोक्ता फोरम ने एक बिल्डर के विरुद्ध बीस हजार रुपया जुर्माना लगाया है। उक्त आदेश फोरम के अध्यक्ष तारकेश्वर नाथ पाण्डेय, सदस्य श्रीमती साधना गुप्ता, राजेन्द्र प्रसाद मयंक ने दिया है।

मामला यह था कि मातादीन निवासी राजरूपपुर ने एक बिल्डर जो भवन निर्माण करके बेचने का कार्य करता है, एक मिनी फ्लैट एलआईजी साढे तीन लाख में क्रय करना चाहा। कहा गया कि यदि कुछ अग्रिम जमा कर दें तो उसे फ्लैट बन जाने पर मिल जाएगा। याची ने एक लाख सत्तर हजार रुपये जमा किया, लेकिन बीस हजार रुपया की रसीद नहीं मिली थी। बाद में उसे बहाना बनाकर फ्लैट निर्माता ने फ्लैट नहीं दिया। थकहार कर वह जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम की शरण में आया और मुकदमा दाखिल किया। अपने रुपये, क्षतिपूर्ति, मुकदमा खर्चा की मांग की।

फोरम ने विपक्षी बिल्डर को नोटिस जारी किया कि वह अपना जवाब पेश करे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फोरम ने सुनवाई के दौरान अपने निष्कर्ष में पाया कि विपक्षी बिल्डर ने सेवा में कमी की है। अपनी जमा धनराशि पर दस प्रतिशत ब्याज, क्षतिपूर्ति व मुकदमा खर्च प्राप्त करने का अधिकारी है। फोरम ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह याची को उसकी जमा धनराशि डेढ़ लाख रुपये पर दस प्रतिशत ब्याज सहित दो माह के अन्दर भुगतान करे तथा जुर्माना धनराशि बीस हजार रुपये व मुकदमा खर्च एक हजार रुपये भी भुगतान करे। स्त्रोत : जागरण, ०८.११.११

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